पढाई के साथ बच्चो को सिखाये लोगो से मिलना – जुलना | Manners for children
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पेरेंट्स अपने बच्चो को पढाई – लिखाई में तो हेल्प करते है । और उन्हें टोकते भी है लेकिन इसके साथ ही उन्हें अपने बच्चो
को लोगो से सही तरीके से मिलना – जुलना भी सिखाना चाहिए । क्युकी आजकल के बच्चे मोबाइल फ़ोन और TV में इतना Busy हो गए
है की उनकी पूरी दुनिया घर में और उनके Room में ही सिमट कर रह गयी है । 5 साल की Age से ही अपने बच्चो को बड़ो से बात करना सिखाये
एक अच्छा Behavior आपकी सही परवरिश को भी दर्शाता है । इसलिए आज हम आपको बताएँगे की कैसे अपने बच्चो को लोगो से
घुलना मिलना सिखाये । और वो क्या कारण है जिसकी वजह से बच्चे लोगो से बात करने से हिचकिचाते है ।
1. Confidence की कमी –
यह बहुत ही Common Problem है । जो अक्सर बच्चो में देखी जाती है इस प्रॉब्लम की वजह से बच्चे लोगो से बात
करने में डरते है क्युकी बच्चो को लगता है की मुझे कुछ भी नहीं आता है । और सामने वाला सबकुछ जानता है दीन भर घर में रहने और mobile
चलाने और टीवी देखते रहने के कारन उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है । इसलिए वो अपने आप को कम आकने लगते है और वो चाहते है की
उनकी किसी से कोई बातचीत नहीं हो ।
2. बातचीत में Problem –
जब बच्चे किसी से मिलते जुलते नहीं है तो उन्हें ये पता नहीं होता है, की किस
तरह से बड़ो से और लोगो से बात करनी है , क्या बात करनी है , अक्सर घर पर मेहमान
आने पर भी बच्चे असहज महसूस करते है । और कई माता – पीता मेहमान के आने पर खुद उनसे बातचीत में बिजी हो जाते है । और बच्चो को कमरे में जाकर खेलने को कह देते है । इससे बच्चे घुलना –
मिलना और बात करना नहीं सीख पाते है इसलिए ऐसा करने से बचे उन्हें भी बात करना सिखाये
।
3. TV और Phone की आदत –
आजकल के बच्चे बस TV और Mobile में ही गुम हो गए है दिनभर बस mobile और mobile
में गेम्स खेलना ही उनकी आदत बन जाती है । और इस Routine के चलते उन्हें लोगो से कैसा व्यवहार करना है
ये पता नहीं होता है । और वो बात करने में हिचकिचाते है इसलिए अपने बच्चो को दीन भर टीवी और फ़ोन में
ना लगे रहने से इन चीजो से उन्हें थोड़ा स्पेस दीजिये जिससे वे लोगो से बात कर सके ।
4. आदर करना –
आजकल के बच्चो को छोटे और बड़े से किस तरह से बात की जाए यह भी पता नहीं होता
है छोटे और बड़ो से बात करने में क्या अंतर होता है । और किस लहजे से बात करनी है ये उन्हें पता नहीं होता है और ऐसे में कोई उनसे
बात करे तो फिर वे अपने माता – पिता का चेहरा देखने लगते है ।
5. पेरेंट्स की शह –
ऐसा कई माता – पिटा में देखने को मिलता है की जब भी बच्चे से कोई question
किया जाता है । तो उनके पेरेंट्स इसका जवाब देने लगते है, इससे बच्चो को शह मिलती है और फिर बच्चो
को इसकी आदत पड जाती है । फिर बच्चे माता –पिता का चेहरा देखते है । इसलिए अच्छा यही है की आप अपने बच्चो को answer करने दीजिये ना की आप उनका
जवाब दे ।
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