जानिये होली का इतिहास, शुभ मुहुर्त और कैसे पूरी करे अपनी इच्छा | Holi 2020



जानिये होली का इतिहास, शुभ मुहुर्त और कैसे पूरी करे अपनी इच्छा | Holi 2020

holi 2020
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होली का त्यौहार आने ही वाला है और बच्चो से लेकर बड़ो तक सभी को इस Colourful Festival का बेसब्री से इन्तजार होता है Holi का Festival दो दिन तक मनाया जता है पहले दिन रात में होलिका दहन किया जाता है और फिर दुसरे दिन रंग – बिरंगे रंगों के साथ होली खेली जाती है इस दिन को धुलेंडी के नाम से भी जानते है होली वाले दिन सभी अपने Family, Friends, Relatives के साथ मिलकर धूम – धाम से होली मनाते है और घरो में मिठाइयाँ, गुझियाँ, नमकीन और पकवान बनाये जाते है और होलिका दहन के दिन होली की पूजा भी की जाती है






क्या है होली की कहानी / क्यों करते है होलीका दहन –


होली की कहानी प्रहलाद, होलिका और हिरण्यकश्यप की कहानी है प्राचीन समय की बात है एक राक्षश राजा था जिसका नाम हिरण्यकश्यप था और उसकी बहन का नाम होलिका था और उसका पुत्र प्रहलाद जो की विष्णु भगवान का परम भक्त था हिरण्यकश्यप ने बहुत साल की तप के बाद एक वरदान प्राप्त किया था भगवान ब्रह्मा के द्वारा की वो पृथ्वी का सबसे शक्तिशाली आदमी है और इसी शक्तियों की वजह से वह बहुत ही अहंकारी बना दिया था

वह अपने पुत्र प्रहलाद को विष्णु भगवान की भक्ति करने से मना करता था और जब उसका पुत्र नहीं मना तब उसने अपने ही पुत्र को मारने का प्रयत्न भी किया जब वह सफल नहीं हो पाया तब उसने अपनी बहन होलिका की मदद मांगी होलिका को यह वरदान प्राप्त था की वह आग में नहीं जल सकती है होलिका ने अपने भाई की सहायता की और प्रहलाद को लेकर चिता में जाकर बैठ गयी लेकिन विष्णु जी की कृपा से होलिका आग में भस्म को जाती है और प्रहलाद को कोई नुकसान नहीं होता है जो  की इस बात का सन्देश देता है की बुराई का अंत अवश्य होता है

बुराई पर अच्छाई की जीत का यह त्यौहार होली के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है और आज भी पूर्णिमा के दिन होली जलाई जाती है और अगले दिन धूम – धाम से रंगों के साथ होली का त्यौहार मनाया जाता है






होलिका दहन का शुभ मुहुर्त –


होलीका दहन का दिन – 9 March (सोमवार)

संध्या काल में – 6  बजकर  22 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक

भद्रा पुंछा – सुबह 9 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक

भद्रा मुखा - सुबह 10 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक

इस तरह पाए होलिका दहन पर शनि – राहू – केतु और नजर दोष से मुक्ति –


1.      होलिका दहन के दर्शन करने से और पूजा करने से शनि – राहू – केतु के साथ नजर दोष से मुक्ति प्राप्त होती है

2.      अगर आप होलिका दहन के बाद उसकी भस्म का टिका लगाते है तो उससे नजर दोष और प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है

3.      अगर आप चाहते है की आपकी कोई मनोकामना है जो की पूरी हो जाए तो जलती हुयी होली में 3 गोमती चक्र हाथ में लेकर अपनी इच्छा को 21 बार मन में बोलकर तीनो गोमती चक्र को अग्नि में डालकर अग्नि को प्रणाम करके वापिस आ जाईये

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