बच्चो से रहे फ्रेंडली, और रखे दोस्ताना रिश्ता !
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आजकल पेरेंट्स अपने बच्चो के साथ काफी फ्रेंडली हो गए है, अब वह जमाना गया जब आप कोई भी बात अपने माता और पिता से खुलकर नहीं कर सकते है । तो अगर आप अब भी अपने बच्चे को डरा-धमका कर हर बात समझाना चाहती है, या चाहती है की वो आपके डर या डाट – डपट से आपकी हर बात माने तो यह धारणा गलत होगी । आपको अपने बच्चो के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना होगा ताकि आपका बच्चा आपसे हर बात बिना किसी हिचकिचाहट से कह सके ।
आजकल बच्चो के उपर पढाई को लेकर भी काफी प्रेशर होता है और जैसे–जैसे बच्चे
बड़े होते है, वे चाहते है की कोई हो जिससे वह अपनी हर बात शेयर कर सके और अपनी बात
रख सके । ऐसे में अगर आप उसे डराकर या डाटकर बाते कहेंगी तो इसका
विपरीत प्रभाव उसके उपर पडेगा । और
इसी व्यवहार की वजह से बच्चो में डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ता जा रहा है इसलिए बच्चो
से दोस्ताना रिश्ता रखे ।
अपने बच्चे की तुलना –
अक्सर पेरेंट्स की यह सबसे बड़ी गलती होती है की वह अपने बच्चे की तुलना अपने
पड़ोसियों के बच्चे या रिश्तेदारों के बच्चो से करने लगते है । यह बात बिलकुल गलत है, इससे आपके बच्चे पर नेगेटिव इफ़ेक्ट
पडेगा । और ये सब करके आप उसका कॉन्फिडेंस लेवल कम कर रहे है, इसलिए
तुलना करना छोड़ दीजिये । अगर आपको एक्साम्पल ही देना है तो
किसी सफल व्यक्ति का दीजिये और आपका उदहारण पॉजिटिव वे में होना चाहिए । आपको यह समझना होगा की हर बच्चे की अपनी क्षमता होती है, इसलिए
आप उसे प्रेरित करे, उसे सिखाये पर उस पर कुछ थोपे नहीं ।
अपशब्द बिल्कुल ना कहे –
आप बहुत ज्यादा गुस्से में अपने बच्चो को अपशब्द कह देती होंगी पर ज्यादा हाइपर
होकर अपने बच्चे को उल्टा सीधा बोलना गलत तरीका है । इससे आपका बच्चा भी गलत वर्ड्स सीखेगा और यह उसके फ्यूचर के
लिए सही नहीं है । कुछ बच्चे बहुत सेंसिटिव होते है,
आपका बच्चा आपके इस व्यवहार से डिप्रेस्ड भी हो सकता है, इसलिए ऐसा ना करे । गुस्सा करना ठीक है, पर अपशब्द कहना ठीक नहीं ।
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कनेक्ट हो –
आजकल माता – पिता अपने कामो में इतना व्यस्त हो गए है की उन्हें अपने बच्चो के
लिए बिलकुल भी टाइम नहीं मिलता है । ऐसे
में आपका बच्चा बिगड़ सकता है, आप थोडा समय अपने बच्चे के लिए निकाले और उससे बैठकर
बात करे । अगर उसे कुछ परेशानी हो तो पूछे और उसे सोल्व करे । अगर आपका बच्चा नाराज है तो उसे डाटने की जगह उससे उसके
नाराज होने की वजह पूछे और उदहारण के साथ उसे समझाने की कोशिश कीजिये । अपने बच्चे से हमेशा कनेक्टेड रहे । आजकल के पेरेंट्स अगर फ्री भी है, तो अपने - अपने मोबाइल
में बिजी हो जाते है, और बच्चे पर ध्यान नहीं देते, इसलिए यह आदते सुधारिए ।
टेम्पर टैट्रम –
जैसे ही आपका बच्चा 10 साल का या इससे बड़ा होता है, उसे उपयुक्त वातावरण ना
मिलने पर वह अपने आपको बड़ो के प्रति तिरस्कार की भावना से देखने लग जाता है । उसे ऐसा लगता है की उसकी इम्पोर्टेंस कम हो गयी है या खत्म
हो गयी है । और यही से वह अपना ध्यान भटकाने लगता है, और अगर माता - पिता
ध्यान ना दे तो बच्चे गलत रस्ते पर जाना स्टार्ट कर देते है और गलत सांगत में आकर
उसके विचार और व्यवहार अपनाने लगते है । इसलिए
आप अपने बच्चे से दोस्त की तरह बात कीजिये और उसे टाइम और इम्पोर्टेंस देने के साथ
– साथ सही राह पर चलना सिखाइये । अगर
आप उस पर किसी के भी सामने गुस्सा करने लगेंगी तो वह इसको गलत तरीके से लेगा,
इसलिए उसे समझिए और समझाइये ।
आर्टिफीशियल इमोशंस –
आजकल माँ – बाप अपने ऑफिस से आते है, और थके - हारे होने के कारण उसे उपरी तौर
पर लाड – प्यार करने लगते है । जब
बच्चे को बनावटी भावनात्मक फीलिंग्स मिलती है, तो उसमे असुरक्षा की भावना उत्पन्न
हो जाती है । और उसमे सेपरेशन एंगजायटी का असर
दिखने लगता है, इसलिए अपने बच्चो को पूरा लाड-प्यार और टाइम दीजिये ।
बच्चो की रिस्पेक्ट करना –
आपको बच्चो को टाइम टू टाइम यह फील कराना होगा की आपका बच्चा आपके लिए कितना
स्पेशल है, उसे ख़ास महसूस कराये और उसके दोस्त बने । आप उनकी पढाई, उनके दोस्त और उनके खेलो व अन्य कामो में भी
इंटरेस्ट ले, इससे वह आपके करीब होगा और उसमे सुधार होगा ।
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