Nirjala Ekadashi 2022 | निर्जला ग्यारस या एकादशी व्रत कथा, महत्त्व:
Nirjala Ekadashi Katha (निर्जला एकादशी कथा) -:
भीमसेन एक बार व्यासजी से कहने लगे की हे पितामह.. पाचों पांडू पुत्र, माता कुंती, और द्रौपदी हमेशा एकादशी व्रत को करने की बात कहते है लेकिन महाराज में पूजा-पाठ दान-धर्म सब कुछ ख़ुशी-ख़ुशी कर सकता हूँ परन्तु भोजन के बिना तो में एक दिन भी नहीं जी सकता है मुझसे भूख कदापि सहन नहीं होती।
इस पर व्यासजी कहते है की हे भीमसेन.. यदि तुम स्वर्ग और नरक को मानते हो तो हर महीने की दोनों एकादशियों को अन्न मत खाया करो। भीम कहने लगे.. हे पितामह.. मैं आपसे कह चूका हूँ की मैं भूख सहन नहीं कर सकता। पूरा दिन उपवास तो क्या में एक भी समय के भोजन के बिना नहीं रह सकता। मेरे लिए ये दुनिया का सबसे कठिन कार्य है।
इसलिए आप मुझ नादान पर कृपा करे और मुझे कोई ऐसे व्रत का सुझाव दीजिये जो की मुझे केवल एक बार ही करना पढ़े और मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाये। व्यास जी कहने लगे हे पुत्र.. शास्त्रों में एकादशी के दोनों व्रत मुक्ति के उद्देश्य से ही रखे गए है जो इसका पालन नहीं करता उसे नरक को भोगना पड़ता है।
व्यासजी के बातें सुनकर भीमसेन नरक का नाम सुनकर डर गया और कांपते हुए पूछने लगा की अब में क्या करूँ महीने के दो व्रत में नहीं कर सकता हाँ परन्तु में वर्ष में एक व्रत रखने की कोशिश जरुर कर सकता हूँ इसलिए यदि कोई ऐसा व्रत हो जो की केवल वर्ष में एक बार ही करना हो और मुझे मुक्ति मिल जाये तो कृपया कर बताइए।
Bhimseni Ekadashi Katha Mahatav (भीमसेनी एकादशी कथा महत्त्व) -:
यह सुन व्यासजी कहते है की ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जिसे निर्जला एकादशी भी कहा जाता है तुम उस एकादशी का व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) करो। इस व्रत में स्नान व आचमन को छोड़कर जल का उपयोग करना मना है। इस दिन भोजन ग्रहण नहीं किया जाना चाहिए क्योकिं भोजन करने से व्रत का फल नष्ट हो (पूरा आर्टिकल पढने के लिए क्लिक करे)

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