जानिए शीतलाष्टमी पर बासी भोजन का धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक कारण







जानिए शीतलाष्टमी पर बासी भोजन का धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक कारण
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आज सोमवार 16 मार्च को शीतलाष्टमी है भारत के सभी जगहों पर आज के दिन बासी भोजन भोग लगाने की और खाने की परम्परा सदियों से चल रही है कहा जाता है की ठंडा और बासी भोजन नहीं किया जाना चाहिए इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है पर वर्ष में एक दिन जिसे हम सब शितलासप्त्मी और अष्टमी के नाम से जानते है 
।  इस दिन साल में एक बार ठन्डे भोजन करने की परम्परा है इसे अलग अलग क्षेत्रो में बसौड़ा, ठंडा पूजन व लसौड़ा के नाम से जाना जाता है ।  शितलासप्त्मी के दिन महिलाएं एक रात पहले से ही खाना तैयार करके रखती है और दुसरे दिन यानि अष्टमी के सुबह शीतला माता को इसका भोग अर्पित करती है व फिर घर परिवार में सभी को खिलाती है ।  अष्टमी के दिन घर में भोजन नहीं पकाया जाता यह तो हुआ एक धार्मिक कारण पर इस त्यौहार के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी छुपा हुआ है चलिए जानते है -

  • पुराणों के अनुसार शीतला माता गधे की सवारी करती है वह अपने हाथो में सूपड़ा, झाड़ू और कलश को थामे रहती है साथ ही नीम के पत्रों का हार भी वह अपने गले में धारण किये होती है। 
  • असल में हिन्दू पंचांग के हिसाब से अभी चैत्र महिना चल रहा है और इस महीने की कृष्ण पक्ष में सप्तमी – अष्टमी को शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी बोला जाता है। 
  • इस समय सर्दी जाने वाली होती है और ग्रीष्म ऋतु का आगमन होने को होता है इसे इन दोनों ऋतुओं का संधिकाल कहा जाता है इस समय भोजन पर खास ध्यान देने की आवश्कता होती है सावधानी बरत कर कई मौसमी बिमारियों से बचाव किया जा सकता है। 

  • इन दो दिनों में शीतला माता के लिए व्रत धारण किया जाता है और परम्परा के अनुसार बासी भोजन ग्रहण किया जाता है इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है की इस संधि वाले एक दिन बासी भोजन करने से ठण्ड के प्रभाव से होने वाली कफ़ सम्बंधित समस्या वर्ष भर कम होती है। 
  • संधिकाल में ठंडा भोजन करने से पेट और पाचन तंत्र को फायदा होता है साथ ही जिन्हें ठण्ड से बुखार, मुहासें व आखों से जुडी कोई समस्या है उन्हें हर साल इस एक संधि वाले दिन बासी भोजन करना चाहिए। 
  • यह काफी पुराने समय से चली आ रही परम्परा है और आज भी बहुत से लोग इसका पालन करते है इस दिन शास्त्रों में स्वास्थ्य के लिहाज से संधि दिवस पर गरम खाना वर्जित माना गया है। 


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